क्या है खालिस्तान? भिंडरावाला ,ऑपरेशन ब्लू स्टार और खालिस्तान का पूरा सच!

खालिस्तान की मांग आज से नहीं 1980 से हो रही है खालिस्तानी समर्थकों का मानना है कि उन्हें एक अलग राष्ट्र मिलना चाहिए!

क्या है खालिस्तान?  भिंडरावाला ,ऑपरेशन ब्लू स्टार  और खालिस्तान का पूरा सच!
खालिस्तान

जानिए खालिस्तान का पूरा सच।
खालिस्तान की मांग आज से नहीं 1980 से हो रही है,, खालिस्तानी समर्थकों का मानना है कि, उन्हें एक अलग राष्ट्र मिलना चाहिए, जहां पर सिर्फ सिक्ख रहे,, और ऐसे ही कुछ कट्टर खालिस्तानी लोग, पाकिस्तान में बैठकर भारत में अराजकता फ़ैलाने का काम कर रहे हैं।

'खालिस्तान' की पूर्ण राज्य की मांग ने 1980 के दशक में जोर पकड़ा. धीरे-धीरे ये मांग बढ़ने लगी और इसे खालिस्तान आंदोलन का नाम दिया गया. अकाली दल के कमजोर पड़ने और 'दमदमी टकसाल' के जरनैल सिंह भिंडरावाला की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही ये आंदोलन हिंसक होता गया. जरनैल सिंह भिंडरावाला के बारे में कहा जाता है कि वो सिख धर्म में कट्टरता का समर्थक था. सिखों के शराब पीने, बाल कटाने जैसी चीजों के वो सख्त खिलाफ था. भिंडरावाले ने पूरे पंजाब में अपनी पकड़ बनानी शुरू की और फिर शुरू हुआ अराजकता का दौर.


साल 1980-1984 के बीच पंजाब में आतंकी हिंसाओं ने जबरदस्त उछाल ली. 1983 में डीआईजी अटवाल की स्वर्णमंदिर परिसर में ही हत्या कर दी गई. इसी साल से भिंडरावाला ने स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया. सैकड़ों हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों से वो हमेशा घिरा रहता था, कह सकdते हैं कि मंदिर को किले में तब्दील करने की तैयारी शुरू हो गई थी.

आखिर में इंडियन आर्मी ने 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को अंजाम दिया।
. 1-3 जून 1984 के बीच पंजाब की सभी सेवाएं रोक दी गई।
. स्वर्ण मंदिर में पानी और बिजली की सप्लाई काट दी गई. स्वर्ण मंदिर के अंदर 6 जून 1984 को एक बहुत बड़ा अभियान चलाया गया, भारी गोलीबारी के बाद जरनैल सिंह भिंडरवाला का शव बरामद कर लिया गया. 7 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर पर आर्मी का कंट्रोल हो गया.


इस ऑपरेशन के बाद सिख समुदाय के लोग इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जबरदस्त गुस्से में थे, कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई सिख नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया.  तमाम लेखकों ने। अपने अवार्ड वापस कर दिये।

महज 4 महीने बाद ही 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके ही 2 सिख सुरक्षाकर्मियों ने कर दी. खालिस्तान आंदोलन यहीं खत्म नहीं हुआ, इसके बाद से कई छोटे-बड़े संगठन बने.
23 जून 1985 को एक खालिस्तानी समर्थक ने एयर इंडिया के विमान में विस्फोट किया, 329 लोगों की मौत हुई थी. दोषी ने इसे भिंडरवाला की मौत का बदला बताया.


10 अगस्त 1986 को पूर्व आर्मी चीफ जनरल एएस वैद्य की दो बाइक सवार बदमाशों ने हत्या कर दी. वैद्य ने ऑपरेशन ब्लूस्टार को लीड किया था. इस वारदात की जिम्मेदारी खालिस्तान कमांडो फोर्स नाम के एक संगठन ने ली.
31 अगस्‍त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय के पास हुए बम विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्‍या कर दी गई थी. ब्लास्ट में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.
इन सब घटनाओं को खालिस्तान आंदोलन से जोड़कर देखा जाता है. कई दूसरे देशों में बैठकर भी खालिस्तान समर्थक भारत में कट्टरवादी विचारधारा को हवा देते रहते हैं जैसे की पाकिस्तान, कनाडा, और United Kingdom

वर्तमान समय में भी ये खालिस्तानी समर्थक देश में उपद्रव फ़ैलाने की कोशिश कर रहे हैं।