Republic Bharat और Republic World: शोर, सनसनी और गिरती पत्रकारिता का आईना
Republic Bharat और Republic World: शोर, सनसनी और गिरती पत्रकारिता का आईना
Republic Bharat और Republic World पर लंबे समय से एकतरफा बहस, आक्रामक एंकरिंग, सनसनीखेज़ हेडलाइंस और तथ्यहीन नैरेटिव गढ़ने के आरोप लगते रहे हैं। यह लेख भारतीय पत्रकारिता के मानकों के संदर्भ में इन चैनलों की संपादकीय शैली, टीवी डिबेट संस्कृति और डिजिटल कंटेंट की गंभीर समीक्षा करता है।
1. Republic Bharat और Republic World: शोर, सनसनी और पत्रकारिता का खोता संतुलन
भारतीय मीडिया में पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा बदलाव आया है—न्यूज़ के नाम पर बहसें, आरोप–प्रत्यारोप, और “टीआरपी के लिए ड्रामा” तेज़ी से बढ़ा है। इसी माहौल में Republic Bharat और Republic World को लेकर लगातार आलोचनाएँ होती रही हैं। दर्शक, मीडिया शोधकर्ता और पत्रकारिता के वरिष्ठ लोग कहते हैं कि इस चैनल की प्राथमिकता “सूचना” नहीं बल्कि “संवेदना को उकसाना” बन गई है।
2. शोर-शराबे की पत्रकारिता: डिबेट से ज़्यादा धक्का-मुक्की
Republic Bharat की डिबेट्स अक्सर समाचार से अधिक चीख-पुकार, कटाक्ष, और राजनीतिक पक्षधरता पर आधारित दिखाई देती हैं।
ऐंकर की आक्रामक शैली दर्शकों को आकर्षित तो करती है, पर इससे मुद्दों की गहराई पर बातचीत लगभग असंभव हो जाती है।
बहस में प्रतिभागियों को पूरा बोलने का समय नहीं दिया जाता
ऐंकर खुद ही अभियोग, जज और फैसला—तीनों की भूमिका निभा लेते हैं
तथ्यात्मक चर्चा की जगह “नैरेटिव सेटिंग” हावी रहती है
इससे न्यूज़ रूम की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और गंभीर मुद्दे भी नाटकीय “शो” में बदल जाते हैं।
3. एकतरफ़ा प्रस्तुति और सवालों की कमी
मीडिया शोधकर्ताओं का कहना है कि Republic Bharat अपनी स्टूडियो डिबेट्स को इस तरह डिज़ाइन करता है कि
पहले से तय निष्कर्ष को ही सही साबित किया जाए।
जिन लोगों से तीखे सवाल पूछे जाने चाहिए, उनसे बहुत नरमी दिखती है
और जिनसे संतुलित सवाल पूछने चाहिए, उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है
नॉन-पार्टीज़न न्यूज़ का यह मूल सिद्धांत—
“सत्ता से सवाल और जनता के प्रति जवाबदेही”
कई कार्यक्रमों में गायब दिखाई देता है।
4. राष्ट्रीय मुद्दों को “ड्रामा” बनाना
सुरक्षा, सेना, या सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चैनल अक्सर
“जंग छिड़ गई”, “भारत पलटवार करेगा”, “तबाही तय”—
जैसी अतिरंजित हेडलाइंस का इस्तेमाल करता है।
यह शैली दर्शकों को भावनात्मक रूप से उकसाती है, पर वास्तविक
रणनीतिक या कूटनीतिक विश्लेषण को नुकसान पहुँचाती है।
मीडिया का काम डर या जोश फैलाना नहीं, बल्कि तथ्य और संदर्भ देना होता है।
5. टीवी रेटिंग्स की भूख: घटना छोटी हो या बड़ी—नैरेटिव वही
Republic Bharat की आलोचना इस बात पर भी होती है कि किसी भी मुद्दे को
अति-राजनीतिक और अति-नाटकीय बना दिया जाता है।
उदाहरण के लिए:
किसी स्थानीय घटना को “राष्ट्रीय सुरक्षा” का विषय बना देना
किसी सोशल मीडिया क्लिप को पूरे देश का मुद्दा घोषित करना
असली सामाजिक–आर्थिक समस्याओं के बजाय भावनात्मक बहसें करना
यह शैली न्यूज़ की प्राथमिकता सूची को बदल देती है, जिसमें
शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोज़गारी, महँगाई जैसे वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
6. रिपब्लिक की डिजिटल शाखा—Republic World की समस्याएँ
Republic World पर भी वही पैटर्न दिखता है:
क्लिकबेट हेडलाइन
आधी-अधूरी जानकारी
बिना सत्यापन वाले सोशल मीडिया वीडियो
एक ही तरफ़ झुका हुआ नैरेटिव
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म होने के बावजूद, “डेटा जर्नलिज़म” या “ग्राउंड रिपोर्टिंग” की कमी स्पष्ट रहती है।
7. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत क्या कहते हैं?
पत्रकारिता के वैश्विक मानक ऐसे हैं:
तथ्य आधारित रिपोर्टिंग
सत्ता से सवाल
संतुलित दृष्टिकोण
भावनाओं से नहीं, प्रमाणों से काम
असहमति का सम्मान
समाज के कमजोर वर्गों की आवाज़ उठाना
लेकिन Republic Bharat पर प्राइम टाइम बहसों को देखकर लगता है कि इन सिद्धांतों की जगह
“अभिनय, उत्तेजना और पक्षधरता” ने ले ली है।
8. कौन-सा journalism मॉडल बेहतर है?
भारत में अच्छे उदाहरण मौजूद हैं—
लंबी ग्राउंड रिपोर्टिंग, तथ्य-आधारित विश्लेषण, शांत और संतुलित बहसें।
एक स्वस्थ मीडिया इकोसिस्टम के लिए ज़रूरी है कि चैनल—
TRP से ऊपर उठें
रिपोर्टर्स को मैदान में भेजें
दबाव से मुक्त सवाल पूछें
दर्शकों को सोचने का समय दें
सूचना, संदर्भ और विविध दृष्टिकोण प्रस्तुत करें
9. निष्कर्ष Republic Bharat और Republic World की शैली
Republic Bharat और Republic World की शैली उन दर्शकों के लिए मनोरंजन हो सकती है जो
शोरगुल में राजनीति का रोमांच खोजते हैं।
लेकिन जो लोग पत्रकारिता को
तथ्यों की खोज और सत्ता की जवाबदेही का माध्यम मानते हैं,
उनके लिए इस चैनल के कई कार्यक्रम एक गंभीर चिंता का विषय हैं।
भारतीय लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका केवल शोर मचाना नहीं,
बल्कि जनता को विश्वसनीय जानकारी और संतुलित दृष्टिकोण देना है।
यही वह कसौटी है जिस पर Republic Bharat की पत्रकारिता बार-बार सवालों के घेरे में आती है।